जिंदगी है रेत सी's image
Poetry1 min read

जिंदगी है रेत सी

Shikha singhShikha singh August 29, 2021
Share0 Bookmarks 53 Reads0 Likes

जिंदगी रेत सी फिसलती जा रही है,

उम्र शाम की तरह ढलती जा रही है,

बस में मेरे अब कुछ भी नहीं है ,

सबकुछ यहां पे बदलती जा रही है

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts