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हाथो की लकीर

Shikha singhShikha singh November 23, 2022
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यहां किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता,

यहां किसी को कुछ भी हंसी-खुशी नहीं मिलता,

छीनना पड़ता है अपने ही हाथो की लकीरो से

जंग लड़ना पड़ता है अपनी ही तकदीरो से ।

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