गौरैया's image
Share0 Bookmarks 78 Reads1 Likes

रोज सवेरे गौरैया आती

खिड़की पे वो बैठ है जाती

चीं चीं कर के शोर मचाती

इस तरह से मुझे जगाती ,

रोज सवेरे गौरैया आती

खिड़की पे वो बैठ है जाती

चावल के दाने चुग जाती

चोंच मे भरकर वो उड़ जाती

रोज सवेरे गौरैया आती

खिड़की पे वो बैठ है जाती

फुदक फुदक कर मुझे रिझाती

पंख फैलाकर वो उड़ जाती

कभी अकेले तो कभी सखा के संग है आती

एक गौरैया रोज सवेरे मेरे खिड़की पे आती ।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts