अपना घर's image
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छोटा सा था घर अपना

जिसमे हम रहते थे,

जो जी में आता था

तब तब वो सब करते थे,

हंसते थे गाते थे

रोते भी थे चिल्लाते थे,

कभी लड़ते झगड़ते बीत जाता था दिन

कभी पता भी न लगता ढल जाता था दिन,

पर अब सबकुछ बदल सा गया है

पिंजरे में कैद पक्षी सा हो गया है।

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