ज़िन्दगी's image
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ज़िन्दगी बे सबब उलझती है

ख़वाहिशे ले के क्यों बिखरती है


ज़िन्दगी को ना हम समझ पाये

ज़िन्दगी उल्टी चाल चलती है


जब भी तन्हा सफ़र में होती हूँ

आपकी याद साथ चलती है


ज़िन्दगी रोज़ मेरी मुठ्ठी से

रेत की तरह क्यों फ़िसलती है


शाम होते ही ज़िन्दगी मेरी

क्यों चरागों सी बुझती जलती है


शिबली सना

प्रयागराज


@shiblisana


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