तुम मधुशाला की तरह हो's image
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तुम साल दर साल 
 सरल होते जाते हो !!
जितना ज्यादा सोचता हूं तुम्हें
तुम उतने विशाल होते जाते हो!!
तुम समुंदर से हो गए हो 
सब कुछ खुद में समेटे जाते हो!!
तुम मधुशाला की तरह हो 
आपस का फर्क मिटाते जाते हो !!
सबको हासिल नहीं तुम 
मिलने अहसास सबको दिलाते जाते हो !!
तुम नही अब हम सबके बीच 
पर रास्ता अब भी दिखा जाते हो !!
तुम साल दर साल 
 सरल होते जाते हो !!
शैलेंद्र शुक्ला " हलदौना"

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