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सिक्ख हूं सिक्ख ही रहूंगा

शैलेंद्र शुक्ला " हलदौना"शैलेंद्र शुक्ला " हलदौना" April 21, 2022
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गुरु तेग को एक दिन मुगलों ने कैद करवाया
तपती आग की भट्टी में बिठाकर खूब तपाया
नुकीली कीलों के तख्त पे गुरु को नंगे पैर चलाया
उसके बाद अहंकारी औरंगजेब ने दरबार सजाया
गुरु तेग को हथकड़ी में जकड़ कर पेश करवाया
बड़े घमंड के ऊंचे स्वर में आलमगीर चिल्लाया
मेरी जिद है तुमको मेरा इस्लाम चुनना ही होगा
मुंह भर भर के तुमको अल्लाह हू रटना ही होगा
वरना तुम्हे गुरु अर्जुन की तरह शुली चढ़ना होगा
गर जो औरंगजेब के हुक्म का ना फरमान होगा
सीस और सिरड में किसी एक को चुनना ही होगा
गुरु तेग ने अब अभिमान से गरजकर शौर्य दिखाया
इस्लाम तू छोड़ मेरे मुख से अब एक शब्द ना फूटेगा
फिर जल्लाद आलमगीर ने गुरु तेग पर कहर ढहाया
काट दो सीस बीच चौराहे पर ये फरमान सुनाया
ललकार कर तब गुरू तेग ने ये जोर से ये फरमाया
ऐसे हजारों सीस अपने नानक पर कुर्बान में कर दूंगा
सिक्ख में हूं जिंदा मरने के बाद भी सिक्ख ही रहूंगा
गुरु तेग का शीश कट जब धरा पर गिरा होगा
माता गूजरी पर सोचो क्या कहर बरपा होगा
9 साल के गोविन्द पर भला क्या बीता होगा
उनके आंसू आंखों से नहीं हृदय से टपका होगा
तब सिक्ख वीरों में बदले का शोला भड़का होगा
गुरु गोविंद ने तब ललकार कर ये सौगंध उठाया
गुरु तेग के कातिलों को जो मैने ना खून से नहलाया
तो फिर न में अपनी माता गूजरी का लाल कहलाया
तब तक ना कोई मेरा सिक्ख वीर चैन से सोएगा
जब तक दरिंदे का सिर धड़ से अलग नहीं होगा
दशमेश ने एक पंथ बनाया जो खालसा कहलाया
अपने पंज पयारों को गुरु ने अमृत पान कराया
फिर एक दिन समय बहुत क्रूर हो आया
औरंगजेब सब जुल्म की हद पार कर आया
दोनों साहिबजादों दीवार में जिंदा दफन कराया
साहिबजादों ने बलिदान दे कर अपना धर्म निभाया
अधर्म पर धर्म की जय का एक नया पाठ पढ़ाया
दक्षिण में गुरु ने मुगलों को हार का स्वाद चखाया
दुश्मन ने फिर अपना घिनौना रूप दिखाया
सोते गुरु गोविंद पर छुपके से वार करवाया
अन्तिम समय पर गुरु ने गुरुग्रंथ साहब सुनाया
अन्तिम गुरु के रूप में सबसे स्वीकार करवाया
फिर खुद को दशमेश ने ईश्वर में विलीन करवाया
जाते हुए दशमेश ने सबको एक आदेश सुनाया
कटता है सीस कट जाए लेकिन अल्लाह हू ना होगा
सिक्ख है तू जिंदा मरने के बाद भी सिक्ख ही रहेगा 

शैलेंद्र शुक्ला "हलदौना"



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