ये वक़्त's image
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क्या सोचा था कभी किसीने

आएगा ऐसा वक़्त भी,

सन्नाटा पसरेगा चारो ओर

और घरों में होगी खुशहाली ।


जितने दूर सबसे हो गए थे

उतने ही करीब सब आ गए,

सोशियल दिस्तंसिंग होकर भी

दिस्तांसिंग सब मिटा गए है।


ना वक़्त का बहाना

ना काम की आपा धापी

चाय की चुस्कियों के साथ है

रामायण, महाभारत की कहानी।


बात बस कुछ पलो की है

रौनक सारी लौट आएगी,

साथ एक दूजे का अगर बरकरार रहा

यह दूरियां हमें और करीब ले आएगी


वक़्त यह भी गुजर जाएगा

पर यह वक़्त कभी वापस ना आएगा,

मुड़कर जब देखेंगे हम, इस गुज़रे वक़्त को

एक थहरा सा वक़्त बस नजर आएगा ।


- खुशबू जाजोदिया

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