खैरात।'s image
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पतझड़ के पत्तो से अपने हालात हैं,
कुचले जाने में ही फिल्हाल निजात हैं

ता उम्र जो बनाते रहे आशियां ए हैसियत,
कुछ लम्हों में बिखर गई उनकी औकात हैं

गामज़न हो रहा हैं यह जिंदगी का शतरंज,
बदल रहे सब प्यादे अपनी बिसात हैं

गले भी यूं मिला वोह जैसे फ़ित्रा अदा हो,
शायद यही मेरे बुरे वक्त कि शुरुआत हैं

परहेज़ हैं आज कल आशिको को इश्क से,
बेकार होने को आई यह बची हुई ज़ात हैं

गालों को चूमने लगीं हैं अकेला छोड़ होठों को
पाख महीने में गरीबों पर बरस रही खैरात हैं

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