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मंज़िल से मिलूंगा

Shatrunjai GiriShatrunjai Giri March 23, 2022
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मझधार में डूबुंगा तो साहिल से मिलूंगा
है खुद पे भरोसा मुझे मंज़िल से मिलूंगा

आयेंगे ज़िन्दगी में कभी धूप कभी छांव
हर धूप को मैं छांव के आंचल से मिलूंगा

हर जीत का जशन तो मनाऊंगा मैं हरदम
हार को भी मुस्कुरा के तह-ए-दिल से मिलूंगा

जो जुल्मतों में ज़िन्दगी हो जाएगी संगदिल
जज़्बों के साथ मैं दिल-ए-बिस्मिल से मिलूंगा

बेशक ये मौत ही है मेरी आखिरी मंजिल
पर मौत मैं तुझे बड़ी मुश्किल से मिलूंगा

~ शत्रुन्जय

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