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उल्फत-ए-नीयत

Shashank ManiShashank Mani September 18, 2022
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प्यार की महफिल में आए, नजर बचाकर चले गए

हमने पूछा प्यार तुम्हें है, नजर झुकाकर चले गए ।।

 

उनका यूँ खामोश गुजरना, दिल को बहुत सताता है

बिना बात के रह न सके, बिन बोले सताकर चले गए।।

 

मुझे नहीं मालूम शिकायत, किन बातों की उनको है

फिर भी बिना सबूत दिखाए, मुजरिम बनाकर चले गए।।

 

उनको शायद लगता होगा, मैं उनका हकदार नहीं

फिर क्यों हमको उल्फत में, बे-दाग दिखाकर चले गए।।

 

चाहत, इश्क, मोहब्बत सारी, सब के सब उनसे सीखा

न जाने फिर क्यों चाहत को, घुटन बताकर चले गए।।

 

उनके दिल को बहलाने का, शायद मैं एक जरिया था

तभी आज किसी और पर अपना, प्यार बहाकर चले गए।।

 

‘सनम’ सुनो यदि की है मोहब्बत, तो फिर बस करते रहना

प्यार की राह में आशिक कितने, दिल को लुटाकर चले गए।।

 

---विचार एवं शब्द-सृजन---

------By------

---Shashank मणि Yadava’सनम’---

---स्वलिखित एवं मौलिक रचना---

 

 


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