माँ-एक वजूद's image
Poetry3 min read

माँ-एक वजूद

Shashank ManiShashank Mani October 9, 2022
Share0 Bookmarks 124 Reads3 Likes


चलते-चलते राहों में जब, मन विह्वल हो जाता है
दिल की परिधि में प्रेम का यूँ, नीरज नीरस हो जाता है।।
मन की बेचैनी, मेरे मन में, व्याकुलता भर जाती है
न जाने क्यों रातों में जब, नींद न अक्सर आती है।।
सच कहता हूँ यारों तब, मंदिर-मस्जिद न जाता हूँ
अपनी माँ की ममता के, आँचल में मैं सो जाता हूँ।।

माँ की ममता की फुहार का, मैं कैसे गुणगान करूँ
कितने हैं उपकार मात के, उसका कैसे गान करूँ।।
माँ की लोरी से बेहतर, न आज तलक संगीत मिला
अक्षर ज्ञान नहीं था लेकिन, माँ से ज्ञान का गीत मिला।।
जीवन में यूँ आज भी जब, मैं कभी उलझ सा जाता हूँ
सच कहता हूँ यारों तब, मंदिर-मस्जिद न जाता हूँ
अपनी माँ की ममता के, आँचल में मैं सो जाता हूँ।।

अभी जेहन में माँ के संग, बिताए पल की यादें हैं
जिद अपनी मनवाने की यूँ, याद सभी फरियादें हैं।।
होली पर माँ से कह कर के, पिचकारी का ले-लेना
दीपावली पर भोग के लड्डू, को लेकर के खा लेना।।
ऐसी स्वर्णिम यादों से जब, मैं भावुक हो जाता हूँ
सच कहता हूँ यारों तब, मंदिर-मस्जिद न जाता हूँ
अपनी माँ की ममता के, आँचल में मैं सो जाता हूँ।।

दूर हुआ तो जाना यारों, माँ की ममता व चाहत
मुझे खिलाकर ज्यादा भोजन, थोड़ा खाने की आदत।।
आज होटलों के खाने में, तरह-तरह के व्यंजन हैं
लेकिन माँ के हाथों जैसा, कोई मिला न व्यंजन है।।
ऐसे भोजन से यारों मैं, कभी ऊब जब जाता हूँ
सच कहता हूँ यारों तब, मंदिर-मस्जिद न जाता हूँ
अपनी माँ की ममता के, आँचल में मैं सो जाता हूँ।।

लोगों से हूँ घिरा मगर, न कोई ऐसा यार मिला
जैसा प्यार किया है माँ ने, ऐसा कहीं न प्यार मिला।।
कितनी भी मुश्किल आ जाए, माँ ने हरदम हिम्मत दी
किस्मत से टकराकर माँ ने, मुझको मेरी किस्मत दी।।
आज भी जब मैं कभी-कभी, किस्मत से हार सा जाता हूँ
सच कहता हूँ यारों तब, मंदिर-मस्जिद न जाता हूँ
अपनी माँ की ममता के, आँचल में मैं सो जाता हूँ।।

जीवन में माँ का होना, यारों पावन सौभाग्य है
जिसने माँ की कद्र न की, ये सबसे बड़ा दुर्भाग्य है।।
दुख की बदली को हर माँ, अपने आँचल में भर लेती
उसके बदले हम सब पर, सुख की छाया है कर देती।।
दुःख की काली छाया से, जब जीवन में घिर जाता हूँ
सच कहता हूँ यारों तब, मंदिर-मस्जिद न जाता हूँ
अपनी माँ की ममता के, आँचल में मैं सो जाता हूँ।।

भले बड़े बन जाओ यारों, लेकिन माँ को याद रखो
मंदिर जाने से बेहतर है, माँ को अपने पास रखो।।
माँ के प्यार, दुआ से बढ़कर, न कोई भगवान है
जिसने माँ को मान दिया, वो सबसे सुखी इंसान है।।
प्रभु पूजा की ख्वाहिश यारों, जब भी मन में लाता हूँ
सच कहता हूँ यारों तब, मंदिर मस्जिद न जाता हूँ
अपनी माँ की ममता के, आँचल में मैं सो जाता हूँ।।




----विचार एवं शब्द-सृजन----
----By---
----Shashank मणि Yadava’सनम’----
---स्वलिखित एवं मौलिक रचना---


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts