खुशी का मूल's image
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खुश रहने का बस एक ही मंत्र है

उम्मीद बस खुद से रखो,

किसी और इंसान से नहीं ।।

हे! मानव तू श्रेष्ठ है, सर्वश्रेष्ठ है,

तुझमें है तेरी मुश्किलों का हल ।।

याद रखना तेरी मुस्किल का हल,

शायद किसी भगवान में नहीं ।।

 

खुशी के पीछे सुनो,

दुःखों की कुर्बानी होती है ।।

सुकूँ की नींद की खातिर,

कई रातें जागनी पड़ती हैं ।।

दिन-प्रतिदिन के प्रयास से यूँ,

पर्वत से राह निकलती है ।।

कर्म से ही बदलती हैं भाग्य-रेखाएँ,

इनका रेखांकन किसी शिल्पकार में नहीं ।।

 

खुद की खुशी के लिए,

दूसरों को खुशी देना होगा ।।

कोई आपके साथ हँसे,

इसके लिए दूसरों के दुःख में रोना होगा ।।

ईर्ष्या, द्वेष, नफरत को छोड़ो,

दिल के भू पर खुशी की पौध निकलेगी ।।

खुशी की फसल का लहलहाना ‘सनम’,

रबी, जायद व खरीफ में नहीं ।।

 

 

---विचार एवं शब्द-सृजन---

---By---

---Shashank मणि Yadava ‘सनम’---

---स्वलिखित एवं मौलिक रचना---

 

 


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