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यत्र तत्र सर्वत्र

Shashank JainShashank Jain February 1, 2022
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धनहीन को वस्त्र नहीं, धनवान घूमे निर्वस्त्र।

यत्र तत्र सर्वत्र।


मानव भूखा मर रहा, और ख़ूब बिक रहे अस्त्र।

यत्र तत्र सर्वत्र।


उजला इनका तन हैं और काला है चरित्र।

और इसको छिपाने को पहने सफेद वस्त्र।


यत्र तत्र सर्वत्र।

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