जनसेवा की लालसा's image
Poetry1 min read

जनसेवा की लालसा

Shashank JainShashank Jain February 2, 2022
Share0 Bookmarks 19 Reads1 Likes

जनसेवा की लालसा


जनसेवा करने की भावना आज मेरे हृदय में आयी

इसलिए गांधी जी की तस्वीर मैंने घर मैं लगवाई।


खद्दर का कुर्ता पायजमा सिलवाया 

और गाँधी टोपी भी मँगवाई। 


अपना परचम बुलंद करने के लिए

शहर में दंगा करवाया और थाने में आग भी लगवाई। 


स्वयं की साधन सम्पन्नता बड़ाने हेतु 

बाज़ार से उगाही एवं बैंक से लोन हड़पने के लिए फ़ाइल भी चलवाई।


सभी समुदाय में घुसपैठ हो मेरी, उसके लिए

विभिन्न आकार प्रकार एवं  रंगो की टोपियाँ भी सिलवाईं। 


सभी राजनीतिक दलों का ध्यान आये मेरे ऊपर

उसकेलिए किड्नैपिंग और गुण्डागर्दी भी करवाई। 


इन सभी कलाओं में संपन्न होने के बाद

पार्टी ऑफ़िस में चुनावी टिकट की अर्ज़ी लगवाईं। 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts