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कर्मों के परिणाम : राम और रावण बनाती है

पियुषपियुष September 11, 2022
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बुरे कर्मों से सामर्थ्यवान की भी अंततः दुर्गति होती है।

हर व्यक्ति राम हो सकता है या राम बन सकता है इसी उद्देश्य से  विष्णु ने राम के रूप में अवतरित हुए , उनका अवतार ये भी शिक्षा देता है कि, रावण जन्म से नहीं दुष्टात्मा थे उनके कर्म ने उनका अद्वितीय पांडित्य समाप्त कर उन्हें राक्षसी प्रवृति से वशीभूत कर दिया ,, उनकी प्रवृति का राक्षसी होने में जिन वस्तुओं एवं क्रियाओं की भूमिका थी वे कुछ ये हो सकती हैं -
 उनका तामसी प्रतिक्रिया , उनके द्वारा प्राप्त की हुई शक्ति के मद में अहंकारयुक्त व्यवहार, तामसी भोजन, तथा अपने ज्ञान और अपनी भक्ति का दुरुपयोग, धर्म के विरुद्ध कार्य, तथा किसी भी आवश्यक या अनावश्यक वस्तु को प्राप्त करने की अनुचित उच्चाकांक्षा ।
                  
इसलिए यदि अद्वितीय प्रकांड विद्वान भी अपनी विद्वता का दुरुपयोग करेगा, सर्व सामर्थ्यवान भी अपने सामर्थ्य पर अहंकार करेगा , उच्च कूल में जन्म लेने पर भी कार्य यदि पापयुक्त हो जाए तो ,
हमारे दृष्टि में हमसे अति साधारण व्यक्ति या जीव से भी हम अपने अंत को प्राप्त हो जायेंगे , यदि वह व्यक्ति सदाचारी हो, निष्पाप हो, अन्य जीव के प्रति सदैव सम्मान का भाव रक्त हो।
     इसलिए जब अहंकार जन्म लेने लगे हमारे अंतर्मन में तो हमें अपने दिमाग को रावण को अंतिम दुर्दशा की ओर अवश्य भ्रमण कराना चाहिए ,जिससे न अहंकार उत्पन्न होने का दुःसाहस करेगा न अपने सामर्थ्य पर हम अनुचित कार्य करने की विचार कर पाएंगे।
#khankhan_piyush 

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