यार ना रही's image
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 कोई खुमारी अब हम पर सवार ना रही
जब उड़ गई छत ओट को दीवार ना रही

उठ थे कुछ इस क़दर की आसमां हो गए
जब गिरे तो जमीं भी हमारी यार ना रही

उससे हाथ जब छूटा तो लकीरें भी मिट गई 
खुदाओं की खुदाई भी मददगार ना रही 

विकाश शर्मा



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