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कइयों को घर से निकलते ही
मंज़िल मिल गई
और हम अब तक सफ़र में है.
जो लोग 
मुझे अपनी मंज़िल से लगे
वो सारे
 किसी न किसी मोड़ पर मूड गए.
रहा मैं और मेरी मंज़िल,
अब हम मिलते भी है या
पहले सफर खत्म होता है,
ख़ुदा जाने.

शहरयार नीरज

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