बचपन से सुना था's image
Share0 Bookmarks 26 Reads0 Likes
बचपन से सुना था
ज़मी मिलती है
आसमां से कहीं
देखता रहा अरसों तक
मगर एक वहम से ज्यादा
कुछ दिखा नहीं.

जितनी हसरतें थी
खुद और इस दुनिया से
सपनों में ही रही
असलियत में तो आयी नही. 

दिल पे हाथ रख कर 
और
खुद पे हौसला रख 
आगे बढ़ आया हूँ,
की तू है कहीं से
देख रहा मुझे.

काफी रास्ता तय कर आया
मगर, तू है तो
फिर दिखा क्यों नही. 

शहरयार नीरज

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts