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भूल गई इन आँखों से !

ShahadatShahadat September 25, 2022
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भूल गई इन आँखों से!

अब क्या कहना?

जिंदगी के दो चार गमों में

भी क्या घुल मिलके रहना?


सुध हमें न अपनी

न अपनों की उम्मीदें

जब जलना ही जीवन भर

तो फिर किसे क्या कहना?


कहो अधूरा अपना जीवन

कौन पूरे अरमां करता

चंद बुद्धि भर के मस्तिष्क में

कौन सागर सा ज्ञान भरता ?


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