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ये चंदन की खुशबू कहा से है आई
दूधिया इस बदन को भी धोया है क्या

जो लटकती है काली ये जुल्फें तुम्हारी
तुमने शबनम से इनको भिगोया है क्या 

एक आशिक नशे में है पागल पड़ा
इश्क में तुमने उसको डुबोया है क्या

मर न जाए कहीं वो तड़प में तेरी
प्यार इतना किसी ने संजोया है क्या

आखिरी बार  उससे समझ  लो जरा
इस मोहब्बत के बदले में खोया है क्या।
                     
                       -शाद गाज़ी 

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