भंवरे का प्यार's image
Poetry1 min read

भंवरे का प्यार

Shad Mohammad GaziShad Mohammad Gazi January 18, 2023
Share0 Bookmarks 75 Reads0 Likes
हंसी एक शाम होने को वो सूरज डूब जाता है
गुजरती रात फिर काली सुबह वो मुस्कुराता है

मेरे विश्वास की गांठे बहुत हल्के में ले ली थी 
मुकद्दर में लिखा हो गर तो तारा टूट जाता है।

सफर भंवरे का फूलों के अधर को चूम लेना है
नदी के प्यार में पडकर समंदर डूब जाता है।

तेरी पाजेब की झंकार को पहचान तो लेते
नकाबों के उतरने से भी आशिक रूठ जाता है।

क़यामत से भला क्या डर कयामत रोज आती है
जब भी मजनू कोई लैला के खातिर मार खाता है

दीवारों और मीनारों से भी ऊंची सोच हो जिसकी
फकत जुल्फों में फसकर के वो उड़ना भूल जाता है

महज रिश्तों की खातिर ही पतंगा जान दे बैठा 
बगरना शाद गाजी तो कहां अब दिल लगाता है।
                          ~ शाद गाज़ी 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts