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मैं नफरत करती हूं।

Shabeena salem khanShabeena salem khan August 6, 2022
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मैं नफरत करती हूं तुम्हारे इन पैमानों से,
जो बना रखे हैं तूने जाने कितने ज़मानों से।


बड़ा अजीब खूबसूरती का पैमाना है,
गोरा रंग जैसे सुंदरता का खजाना है।
कितनी हो हाइट, क्या हो वेट, 
बाल कैसे करूं मैं सेट।
यह भी क्यों तुम्हें बताना है, 
कि मेकअप मुझे कितना लगाना है।
मत तोलो खूबसूरती मेरी रंग - रूप के सोपानों से,
मैं नफरत करती हूं तुम्हारे इन पैमानों से।।


जरा धीरे बोलो, ऐसे मत बैठो,
यह मत पहनो, इतना जोर से मत हंसो,
उठा सकते हो हाथ भी मुझ पर, पर आवाज मेरी दवाई है, चाहते हो घरवालों की दासी बना कर रखना, जबकि ली तुमने मेरे पापा भी कमाई है।
मुझसे नहीं मतलब तुमको है साथ लाए सामानों से,
मैं नफरत करती हूं तुम्हारे इन पैमानों से।।


मेरे चरित्र का भी तुमने एक सांचा बनाया है,
कपड़ों को मुझ से ऊपर बताया है।
यह क्यों भूल जाते हो स्कर्ट तुम ही ने तो पहनाया है,
सूट में तो हमेशा मजाक उड़ाया है।
अगर लिबास से तय होता है कैरेक्टर,
अगर लिबास से तय होता है कैरेक्टर,
तो अवगत कराओ हमें अपने मापदंड के मानों से,
मैं नफरत करती हूं तुम्हारे इन पैमानों से।।


गर हंस गई तो कहते हो फंस गई हूं,
अपनी मर्जी से जीने को तरस गई हूं।
हर उम्र में बस बंधन में बंध गई हूं,
कभी-कभी लगता है मैं होकर भी शायद नहीं हूं।
क्यों मेरी पहचान तुझमें समाई है,
क्यों तेरी क्रूरता को दया नहीं आई है।
तंग आ गई हूं तुम्हारे इन बेढंगे ढिंगानो से,
इसलिए नफरत करती हूं मैं तुम्हारे इन पैमानों से।।


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