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जो पंडित पूजा करता है,

सबसे ज्यादा दुःख उन्हें सहना पड़ता है। 

ऐसा क्यों?

भगवान पाठ से संतुष्ट नहीं होता है,

सिर्फ काम उन्हें संतुष्ट कर सकता है। 

 

पंडित ने सोचा पूजा करके

दूसरा कोई काम पे शामिल हो-

वह खेती की- खाना मिला;

वह घर बनाया- आश्रय मिला;

वह बुनाई की- लज्जा मर गयी;

वह दौड़ा समय के साथ- सभ्यता की प्रगति हुई।

 

भगवान आकर बताया,

'तुमने दिमाग का इस्तेमाल किया मैं खुश हूँ।

तुमने हाथ और पैर का इस्तेमाल किया मैं खुश हूँ।

तुमने ज़िंदगी का इस्तेमाल किया मैं खुश हूँ।

तुमने श्रेष्ठ पूजा की हो' 

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