अमृता सी तुम's image
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न कोई तपिश मिले, न तुझपे कोई बोझ हो
मुझे हिज़रत मंजूर है गर रक़ीब इमरोज़ हो

नफ़रत की इस फिज़ा में जो भी इश्क़ करे
इश्क़  करनेवाले  को बस तेरी ही खोज हो

आंखों  को इसके सिवा और क्या चाहिए
गर इन आँखों को तेरी दीद रोज-रोज हो

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