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तुम्हारा प्रेम-पत्र (एक प्रेम-रस की कविता) - सौरभ सुमन की कलम से

Saurabh SumanSaurabh Suman October 30, 2022
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अभी रात्रि के कई प्रहर हैं बाकी,

सवेरा को छलता घोर तिमिर की झाँकी।।

निंदिया को अँखियों से परे झटकाए,

नयनपट पर स्मृति की वृतांत सजाए।।

मुस्कान ओंठो पर लाके अति मोहक,

हृदय कुंज में प्रीत भरके अति पावक।।

उँगलियों में तुलिका दबाए लजाती,

मन में शब्दें बुनकर, पलकें झुकाती।।

लिखूँ पत्र में क्या? यही सोच केवल,

दीए को जलाए जागती रात प्रतिपल।।

कभी आप से, कभी पन्नों से खिन्न होती,

धैर्य-धर फिर अक्षरों के बंधन पिड़ोती।।

प्रारंभ और अंत क्या, सब तो वही था,

पर भावों हर बार का अध्याय नया था।।

भावुकता से बुनके, अंतःकरण से जन्मी,

प्रेम-पत्र पर उभरी, तुम्हारे जिय की कहानी।।

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