तूं एक अकेला है राही's image
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जग झमेली धारों में,
जीवन के विकट किनारों में;
सुनसान अकेला तूं राही
विपता के विषम विकारों में।
तू एक अकेला है राही।।१

मरू मृगछलता के बने सफर,
कई शूल,शरो से सने शहर;
कटु,स्पर्ध डग-डग पनपे हैं
विषबीज तरू से उगे ज़हर।
तूं एक अकेला है राही।।२

पथ मोड़ विषम बामी विषधर,
डसने को तत्पर दंत अधर;
सिंधु झोंके कृष्णांत उगें
पर चरण चढ़ें यूं लक्ष्य निखर।
तूं एक अकेला है राही।।३

तुझे पाने प्यासी मंजिल,
राही तूं है अमिय सलिल;
एक पंथ तूं पकड़े जाना
मंजिल खुद आएंगे चल।
तूं एक अकेला है राही।।४
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