सांझ आए चैतुआ's image
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मृदु मंद आभा 
हुए अनल हरिम पात;
शोणित सम पथ झड़े पुहुप,
मिश्रित मिठास मंद वात।

सर का धवल तन पियरी,
नभ का लिलाट रोहित;
बगुले बगलें झांक रहे,
शशि आने को आतुर मोहित।

मेड़ों पर झडियां लगीं,
अरु पलाश छितरे सर कानों पर;
शिशु वक्ष बांधे बढ रहे -
चैतुआ अपने ठिकानों पर।


- सत्यव्रत रजक
26/12/2021

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