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शब्द विद्रोही
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मोल क्या शब्दों का प्रतिबिंब छुएगा,
किसने कविता को विक्रय कहा आज; 
धन,मद,वैभव से बढ़कर कवि को,
सच्चा मिलता है नव-नव यशराज।

जिसने कविता को न जाना कभी,
दो शब्द लिखे न जीनें में;
वे तो वार करेंगे ही,
जिन्हें द्वेष शब्द रस पीने में।

कवि ने कुछ ही लिखा आज,
उनको शब्दों से विद्रोह लगा;
न तो वे कविता को जानें,
न उनमें कोई मोह जगा।


-- सत्यव्रत रजक
05/09/2021

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