राष्ट्र धर्म's image
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राष्ट्र धर्म रक्षा हित रहित
रहता जो मन-मानव है;
विकल बोझ धरणी धर पर
वह देव नहीं न दानव है।१।

जिसने स्वमन पिया न शोणित
जिसने क्लिष्ट जिया न जीवन;
जिसने घाम-श्वेद न सूंखा
वह व्यर्थ रहा आजीवन तन।२।

जो कर्मचोर सम मदिरा मद मस्त,
इन्हें कौन कहेगा कर्मवीर;
जो पूर्ण दिवस सुस्ती मन सोया,
है कौन कहेगा कुशल प्रवीर।३।

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28/08/2021,

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