रक्त का इतिहास's image
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उन पुराने पन्नों में देखा झपटते इतिहास,

एक रोटी को सिंहासन पर मन था त्रास-त्रास;

और मनुजता उस काल जो कि जगनी चाहिए,

डर के आतंकों से थी करती मुक्त गगन में वास।


हाय,मरा जीवन बस निज की एक ही गलती पर,

काश हाशिये को ही बना देते तलवार खास;

वीभत्स, करुण, दारुण,पीर पके दृश्यों से,

  तब रोते क्यों ये इतिहास के पन्ने अनायास।

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