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पिता का रोना
बहुत गहरा होता है।
वास्तव में,
उनका रोना
सृष्टि में दुर्लभ है;
क्योंकि वह हर बार
आंशु आने से पहले
आंख पोंछ लेता है।
पिता का रोना -
बांध का टूटना है
नदी के बल से।
-

- सत्यव्रत रजक 

#स्वरचित_पंक्तियां

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