नारी..... हे भारत!'s image
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ओ नारी मातृ, देवी, भगनी : हे भारत,
ओ अजेय क्रांति के संचालन रत।
जीवन औरों को अर्पित कर,
गृह,लोक,क्रांति को जीवन भर।
ओ नारी..... हे भारत!


प्रभालोक की देवत्व सकल, 
सिंह शक्ति ओ अविकल।
अंतर की पीड़ा पा पाकर,
बाहर दिखती मुस्काती भर।
ओ नारी..... हे भारत!


दो कंठ की कंठेश्वरी,
दो द्वार की गृहेश्वरी।
एक हिय दो अंश विभाजित,
दो अंश सदैव सिंचति नित।
ओ नारी..... हे भारत!

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