मृत्यु का आगमन's image
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थरथरा कर वदन,

जमता नब्ज रुकता रुधिर;

चक्षु उठे डबडबा,

अंत के देखे खुले अधर।


हिय की गति प्रबल,

मृत्यु के देखे खुले किवार;

आरती जय काल की,

अंत की लम्बी लगी कतार।


सब्र के टूटे पट-बंध,

खुल उठे कपोल युगल;

स्तब्ध हुए ओष्ट,दृग,

खुल उठे द्वि करतल ।


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16/112021

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