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Mahatma GandhiPoetry1 min read

मैंने गांधी को मरते देखा है!

सत्यव्रत रजकसत्यव्रत रजक October 2, 2022
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भारी चौक चौराहों पर,
लिटती-पिटती राहों पर,
बेमतलबी गुनाहों पर,
टूटी रीढ़ की आहों पर;
मैंने गांधी को मरते देखा है!

शासन की जय में,
जनता की हय में,
कुर्सी के भय में,
भय के अनय में;
मैंने गांधी को मरते देखा है!

जनतंत्र की चौपालों पर,
बुनियादी दीवारों पर,
पगडंडी के भालों पर,
मदमादी चालों पर;
मैंने गांधी को मरते देखा है!


- सत्यव्रत रजक


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