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मधु वर्णन
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मनुज मनु मधुप रति,
मधुर मधु मदान्ध मति;
सुमन ससर्प सुगंध गति,
सबल,सरस,सजल अति।

प्रभा प्रथम पर्व प्रभात,
प्रसन्न पियूष पलास पाँत;
पकी फसल पंक्ति परात,
पके पूर्ण प्रसून पराग जात।

हरिभि-हरिम खिले वृंत तान,
हिले-हिले हरेक मान;
वात विशुद्ध-शुद्ध वितान,
विपुल विराट दिवावसान।

कूक कृष्ण कोकिल गगन,
खिले क्लेश,क्लांत मन;
आम अल्हड़ अडे अतुल तरु तन,
उगी अनल बेर वृक्षों जगी दावानल वन।

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15/10/2021

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