खुशामद's image
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इतनी पूजा करते नही-
हम देव-देव अवतारों की
हम जितनी खुशामद कर रहे-
इन पटवारी-तहसीलदारों की ।


जमीन अपनी पट्टा अपना ही सही,
पर उनके हाथ है सब कलम-काम ; 
साहिब अगर बिगड़ गए जरा;
पता नहीं,कब क्या कर दें नीलाम।

कौन है देखने वाला मसीहा,
सबके मुंह नकदी से सिले हैं;
यहां एक खाट, टूटी झोपड़ी है
वहां बंगले, बागान, किले हैं।





- सत्यव्रत रजक  

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