खेतों में फागुन's image
Share1 Bookmarks 50 Reads2 Likes
खेतों में फागुन
-------------------------

बालीं जो थिरकती,
मारुत की सनत में,
सूर्य विभा आभा महिन,
खेतों अनगिनत में।

फागुन बरसाता जो,
फूल,फलीं,कलीं सरसों,
मादक मदान्ध मधु-
हुआ कई बाद बरसों।

गेहूं के खेत घने,
रक्त मलिन अब बने,
बाजू में बजें चने,
फागों से हैं सने।

धुले धूलधूसरित मन,
लिएं कांति नवल गगन,
मंद कभी वायु सघन,
देख धरा नेह जन। 
--
18/07/2021

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts