कलम-पत्र's image
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शासन सोये, राजन सोयें,
सोये विपुल देव नभ सारा;
पर कलम पत्र न सो जाए,
कवि यह दायित्व तुम्हारा ।

तुम कवि हो कविता लिखो,
लिखो जग दारुण दृश्य;
अनल उगा दो शब्दों से,
नित नूतन कलमें तोड़ो अवश्य।।

ओह पता था मनुजता एक दिवस सो जाएगी,
सत्य,धर्म,अध्यात्म कुशलता सब खो जाएगी,
तब केवल कविता ही तुझपे लाज रखें हूं मैं;
कलम-पत्र ही जीवित होगा,धरती सब रो जाएगी।

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