जनता's image

हर, सौ विकृति के बीच पला,

जिसे नित नूतन अविराम बला;

मृत्यु जिसे सूंघ न सकी,

वह मर-मर कर भी जी पला।


जिस बिन है यह अबनी निष्प्रान,

पग पग पर वह कुटा-लुटा महान,

जिसे चाहती समीर ललक कर,

पेड़ों की पातर खुलती पिलक कर।


कार्यनिष्ठा देखकर भानु भी ओट लेता,

करुणा से तुंग श्रृंग भी निर्झर झर देता;

जानते वह कौन है? ऐसा महान देवता,

वह है : माटी का मनुज,माटी की जनता।

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