हमारे गांव में....'s image
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ग़ज़ल
..
हमारे गांव में केवल सड़क पर रोशनी है;
वहां अब भी अंधेरा है जहां बस्ती घनी है।
चार पुल डकार चुके फिर भी पेट में भूख है;
जहां सूखा पड़ा मैदान, वहां पुलिया बनी है।
फसल का मुआवजा बंट रहा सरपंच की पौर में;
यहां आवाम भिखारी रह गई, पर पंचायत धनी है।
दिल्ली में तसलों के सहारे जनता बुझाती है प्यास;
यहां विकास के कुआं की खुदाई में मशीन सनी है।

- सत्यव्रत रजक

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