गेहूँ और किसान's image
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मेरा गिरा हर निवाला
ऐसे उठाना जैसे
कोई उठाता हो अबोध शिशु को!
बाली से मुझे ऐसे तोड़ना जैसे
 सिर से छोड़ते हों बालों को!
मुझे पीठ पर ऐसे रखना जैसे
कोई पिता का जवान बेटे के
 कंधे पर पहला हाथ!
मुझे पीसना तो सही
पर वक्त से बाँधे रखना
आवारा चक्कियों से नही।
मुझे तवे पर रखने से पहले
अपनी हथेलियों से
छू लेना तवे का ताप!

खैर, तुम तो मेरा परिचय तभी पाओगे
जब होगा जीभ पर आभास
मैं जानता हूं कि ये स्वाद
केवल जीभ पर उतरेगा
दिमाग पर नही!
तुम्हारी चिंताओं के
 घने जंगल से होकर
गुजरेगी मेरी मीठी-सी रेल
कंठ से पेट तक!



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