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अरे पास के खेत!
अरे पास के खेत कि तूने क्यों छोड़ी ओछी हरियाली
क्यों छोड़ा है तूने हल ये, क्यों छोड़ी गोधूमि बाली
था ससर्प से तनु अलंकृत आज उसी को ही छोड़ा
रंजे पसीने से भी तुझने आज पुराना नाता तोड़ा।१

अरे सूखते भूरे तिनके!
अरे सूखते भूरे तिनके,
तड़प-तड़प कर अब क्यों रोता
अभी तो शुरू हुआ ये नवयुग
देखो आगे क्या होता
अभी तो खड़ा यह लघु निकेतन
अब होगी खड़ी इमारत
बोझ तले तब दब जाएगा
अरे खेत तूं रत-रत।२

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