अरे कुकुरमुत्ते's image
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अरे कुकुरमुत्ते;
तुम सौन्दर्य भले ही सजे,
अच्छा है! पर बदले जाओगे;
तुम दो दिन के गुलदस्ते हो,
कल लातों कुचले जाओगे!

तुम भले ही मृत मृदा,-
कंकर, पाषाण, झाड़ जमे;
मानव निज स्वादों से बचकर,
रह न पाओगे सदा रमे।

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