आह बचपन...'s image
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हवा की हिलोर में उड़ गेंदा से फूले;
भैया वीरान हो गए वे नीम पर झूले।
माटी के खेल माटी के भदूने,
मेडों की दूब तो लोटते दूने।
बेर-जामुन सबके लिए बड़े खास थे,
दौड पहुंचते, वहीं करते निवास थे।
पाठशाला, क्या दिन वे खास थे
पढ़ने को कहा तो बैठे उदास थे।
हाय बचपन..... आह बचपन...... रे बचपन।

- ✍️ सत्यव्रत रजक

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