पगली का पत्र's image
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प्रियतम को पाती लिख पाऊँ,
इस योग्य पिता ने बनाया है, 
सुन्दर उत्तर खत पढ़कर के,
दुख हरो जो मन पर छाया है।

नाहक ही रखते हो विषाद,
अब दिल पर कोई बोझ न लो,
तुमको क्या लगता मै खुश हूँ,
दुख व्यथा भी मेरी सुन ही लो ।

अमावस की काली रातों का,
रंग आँसू के संग घुलते है,
सन्नाटे से कमरे मे,
जब सब सोते हम रोते है।

बार बार दोहराने से,
यादें भी चुक जाती है,
जब क्षण वियोग को याद करूँ,
माथे की नस दुख जाती है ।

प्रियतम वियोग की व्यथा दुखद,
गलती मेरी अब क्षमा करो,
साथी का साथ जरूरी है,
भ्रम दूर हुआ अब अपना लो ।



सत्य नारायण तिवारी

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