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बेटी - वंश श्रृजक

Satya Narayan TiwariSatya Narayan Tiwari September 26, 2022
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बेटी ना हो तो वंश को चलाएगा कौन? 
क्या बेटा? कदापि नहीं, 
तो फिर बेटी को इस समाज में क्यूं बेटें सा प्यार नहीं? 
सर्वत्र बेटीयो को क्यूं समान अधिकार नहीं? 
जन्म-मरण के जीवन पथ में क्यूं मिलता न सम्मान, 
होती जलील, रहती सभीत, क्षण-क्षण उन्हें मिले अपमान, 
कुलकलंकिनी नाम पड़े , जब जन्म ले धरा पर आए, 
पूरे कुटुम्ब के आनन पर जैसे मातम सा छा जाए, 
बेटी के धरा अवतरण पर, क्यों झूठी खुशी दिखाते हैं? 
वही कुटुम्ब बेटों के जन्म पर, ढोल नगाड़े बजाते हैं, 
इसमे उनका भी दोष नहीं, मुझ को उन पर कोई रोष नहीं, 
पुरातन समय से चली आ रही किवदंती को सुना रहे, 
पितृ पीढ़ी से मिले सीख को, फिर से वो दोहरा रहे, 
लेकिन अब सोच बदलना है, की बेटा ही जीवन का गहना है, 
बेटी है कुटुम्ब श्रृजक, बेटी शक्ति का रूप है, 
यदि बेटी हो प्राणाधार में, उनका जीवन अनूप है, 
तो फिर आने वाली पीढ़ी को, अब यह सीख सिखाना है, 
बेटी है वंश श्रृजक, बेटी को बचाना है।

                     Satya Tiwari 


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