'तकदीर''s image
Share0 Bookmarks 112 Reads3 Likes
तक़दीर मेरे संग द्वन्द्ध अपनाए बैठी है
मेरा आकाश छूने का प्रण है,
और ये मुझे जमीन पर जमाए बैठी है..
'तकदीर' कितना भी गिराना चाहे
काली घनी रातों मे रखना चाहे,
इसके तूणीर के हर तीर को काट
ये निगांहे प्रभा की ओर देखना चाहे..

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts