तुझसे बिछड़ के's image
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आसमां के न रहे, जमीं के न रहे,

तुझसे बिछड़ के हम कहीं के न रहे।


उम्र भर बदलते रहे शहर दर शहर,

जहाँ अपना घर था, वहीं के न रहे।


सबको पाने की झूठी मृगतृष्णा में,

जिनका होना था उन्हीं के न रहे।


साहिल पे बिखरे हुए हज़ारों पत्थर,

पानी में रहकर भी नदी के न रहे।


-संजू

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