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दूरियों फासलों को ढह जाने दो

Sanjay LadeSanjay Lade February 17, 2022
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दूरियों फासलों को ढह जाने दो

अश्क़ थमे नही तो बह जाने दो

कहना चाहती है ये कई अफसाने

नज़रोको आज कुछ कह जाने दो

बाहोंमे आये हो बस यूंही पड़े रहो

वक़्त गर बहता है बह जाने दो

तुम्हारे हुस्नकी इंतेहा हो इस कदर

बंदी बनके इसका मुझे रह जाने दो

अब जो भी समझो वही मंज़ूर

गलतफहमी की वजह जाने दो

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